सिख समाज को मुस्लिम पक्षकारों ने लौटाया चेक

सहारनपुर।  मुस्लिम पक्षकारों ने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को चार लाख का चेक लौटाकर सौहार्द की मिसाल पेश की है। मुस्लिम पक्षकारों को यह चेक सिंह सभा द्वारा मस्जिद की भूमि खरीदने के लिए दिया गया था। वहीं दोनों पक्षों के बीच डील का आरोप लगाने वाले दि इस्लामिक फाउंडेशन ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए मामले को क्लीन चिट दे दी है। सिख समाज द्वारा बैसाखी पर भव्य समागम करने का निर्णय लिया गया है।


रविवार को अंबाला रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए अकाली दल के प्रदेशाध्यक्ष स.गुरप्रीत सिंह बग्गा ने कहा वर्ष-2014 में हुए दंगे के दौरान महानगर में करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था और उसी समय से दोनों पक्ष मामले के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने कहा कि बैसाखी पर भव्य समागम का आयोजन कर सर्व समाज के लोगों का सम्मान किया जायेगा। मुस्लिम पक्षकार मोहर्रम अली पप्पू ने कहा कि इस प्रकरण में न कोई हारा और न कोई जीता। समझौते के अनुसार मस्जिद के लिए 200 वर्ग गज भूमि की खरीद के लिए बैयाने हेतु चेक दिया था, यह कोई डील नहीं थी। गुरुद्वारा भवन के निर्माण में वह सिर पर तसला रखकर कार सेवा करने वालों की प्रथम पंक्ति में शामिल रहेंगे। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान स.जसबीर सिंह बग्गा ने कहा कि यह समझौता आपसी सहमति का प्रतिफल है। नवीन गुरुद्वारा भवन में बाबा फरीद के नाम से डिस्पेंसरी आदि का नाम रखा जायेगा। वहीं 27 फरवरी को समझौते में परदे के पीछे डील का आरोप लगाने वाले दि इस्लामिक फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद अली एडवोकेट ने अपनी भूल स्वीकारते हुए पूरे प्रकरण को क्लीन चिट दी। इस दौरान मोहर्रम अली पप्पू ने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान स.जसबीर सिंह बग्गा को चार लाख का वह चेक लौटा दिया, जो 26 फरवरी को सिंह सभा द्वारा दिया गया था। इस मौके पर स.आइपी सिंह, सुधांशु रघुवंशी, सत¨वदर सिंह राणा, पर¨वदर सिंह कक्कू, इंद्रजीत सिंह बग्गा, मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जाकिर हुसैन आदि मौजूद थे।


 


यह था विवाद का कारण


सहारनपुर शहर के गुरुद्वारा रोड पर वर्ष-2014 में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के बराबर वाली भूमि पर सभा द्वारा गुरुद्वारे के नवीन भवन का निर्माण कराया जा रहा था। भूमि के एक हिस्से पर मुस्लिम पक्षकार द्वारा मस्जिद होने का दावा किया गया। कुछ लोगों की नासमझी ने शहर को 26 जुलाई को दंगे की आग में झोंक दिया था। दंगे में तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।